सुसंस्कृति परिहार
मध्यप्रदेश के स्थानीय जिला पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में जनता ने थोड़ा डर डर कर भाजपा के भ्रम को जिस तरह तोड़ा है ।वह तसल्लीबख्श है और जनता के हौसले को बुलंद करता है जो आसन्न भय के साए में हैं।यह आगे चुनाव में खुलकर निडर होकर चुनौती स्वीकारेगा यह उम्मीद बांधी जा सकती है। जिला पंचायत चुनाव प्रदेश के 52 जिलों में से 30पर भाजपा और 11जिलो में कांग्रेस को बहुमत मिला है।अन्य 11 जिलों में भी कांग्रेस की स्थिति बेहतर हुई । निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या में मैदान की उपस्थिति से भी कांग्रेस को नुक्सान हुआ है।ये प्रत्याशी दोनों दलों की वोट तो काटे ही हैं लेकिन जो पहलू खतरनाक है वह है सत्ता लोलुपता।हम सभी जानते हैं ऊपर से नीचे तक निर्दलीय या छोटी पार्टियों के लोग किसी दल के बहुमत पूर्ण ना होने की स्थिति में सारी फिज़ा बदल देते हैं। आजकल तो दल-बदल का घिनौना जो खेल खेला जा रहा है। उसमें किसी भी दल से विजयी प्रत्याशी को भी नहीं बख्शा जा रहा है।पैसा ख़ूब बोल रहा है और जनता का पैसा कहां और किसके पास है ये सब जान रहे हैं। लेकिन मंहगाई और राजनैतिक खतरों की परवाह ना करके लोग जिस तरह कांग्रेस को समर्थन दिए हैं वह अप्रत्याशित और सुकून लायक है।नगर पंचायतों में भी भाजपा से सम्मोहन टूटा है।अधिकांश वोट निर्दलीय लोगों को मिला है लेकिन अधिकांश जिला पंचायतों और नगरपालिकाओं में कौन बैठेगा और कैसे ये सच किसी से छुपा नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण परिणाम तो महापौर पद के चुनाव में सामने आए हैं जिसमें तथाकथित महाराज का घमंड जनता ने ग्वालियर में चूर चूर कर दिया है। सन् सत्तावन के संगी गढ़ को जिस तरह मात देकर कांग्रेस की साधारण महिला नेत्री शोभा सिकरवार ने महापौर पद पाया है।वह बड़ी जीत मानी जा रही है लोगों का ख्याल है कि सामंती गढ़ अब टूट रहे हैं। जनता का उनसे मोह भंग हुआ है यही स्थिति दिग्विजयसिंह के गढ़ में हुई है। लेकिन सिंधिया के क्षेत्र की हार बहुत शर्मनाक जबकि महाराज इस वक्त केंद्र सरकार में मंत्री हैं। चंबल क्षेत्र से ही मुरैना नगरनिगम से शारदा सोलंकी की जीत ने केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह चौहान को चौंकाया ही नहीं बल्कि भाजपा का दरवाजा बंद करने की चेतावनी भी दे डाली है।चंबल के मुरैना और ग्वालियर के गढ़ तोड़ने वाली महिलाओं को सलाम। उधर रीवा नगर निगम में कांग्रेस के अजय मिश्रा की जीत भी विंध्यक्षेत्र से विशेष संदेश दे रही है जहां भाजपा के ताज़िए ठंडे किए हैं।। सिंगरौली नगर निगम में आप की दस्तक भी भाजपा के खिलाफ जनता की वोट है।आप की इस प्रदेश में प्रवेशीय जीत से तथा शिवपुरी नगर पालिका में अध्यक्ष पद की कामयाबी के साथ ही लगभग एक दशक पार्षद जीतना अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा की बी टीम की बड़ी घुसपैठ है।
इसी तरह जबलपुर में जिस तरह संघ और पूर्व पार्टी अध्यक्ष और सांसद राकेश सिंह का दख़ल रहा है। मुख्यमंत्री ने यहां से जबलपुर के नामवर चिकित्सक जितेन्द्र जामदार को संघ की पहल पर टिकिट दिया और चुनाव के दौरान दौरे किए गए वे एक सामाजिक कार्यकर्ता कांग्रेस उम्मीदवार जगत बहादुर सिंह अन्नू की जन सेवा के आगे ध्वस्त हो गए । जबलपुर की जनता की तारीफ़ करनी चाहिए कि उसने देश के तमाम प्रत्याशियों के लिए एक मिसाल कायम की है कि यदि व्यक्ति सच्चे मन से जन सेवा करता है तो उसके सामने बड़े बड़े नामधारी भी असफल हो जाते हैं।यह जीत कांग्रेस की बड़ी जीत है।इसी तरह कटनी नगरनिगम पर भाजपा से असंतुष्ट प्रीति सूरी की समाज सेवा की वजह ही निर्दलीय जीत का सबब बनी। उनके वोट भी सीधे-सीधे भाजपा के विरुद्ध ही है किंतु बहुत संभावनाएं इस बात की बन रही हैं भाजपा अपने असंतुष्ट साथी को वापस अपने खेमे में ले आए।यह प्रीति के लिए बिल्कुल सहज काम हो सकता है किन्तु यदि ऐसा होता है तो यह जनता के भाजपा के खिलाफ किए वोट का अपमान होगा।यह बी डी शर्मा प्रदेशअध्यक्ष भाजपा के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है वे भाजपा की हार को जीत में बदलने हेतु निश्चित सक्रिय होंगे चूंकि यह उनकी साख का सवाल है।लोग लिख रहे हैं वीडी शर्मा ने हार का इतिहास बनाया वे ससुराल जबलपुर और मायका मुरैना के भी साथ कटनी संसदीय क्षेत्र भी हारे हैं।
बहरहाल पिछले चुनाव में 16 नगरनिगम पर काबिज भाजपा 9 पर सिमट गई है।उसका मालवा अंचल पर दबदबा बना हुआ है। लेकिन इंदौर,देवास, रतलाम और भोपाल में जो जीत का आंकड़ा है वह घटा हुआ है। कांग्रेस ने जिन पांच नगरनिगम को लंबे अर्से बाद अपने कब्जे में लिया उनमें ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के साथ मुरैना बहुत मायने रखते हैं। छिंदवाड़ा जो कमलनाथ का संसदीय क्षेत्र है वहां तो पंचायत नगरपालिकाओं और नगरनिगम सब पर कांग्रेस का परचम फहरा रहा है।ये पांच शहर पंजे को जिस तरह स्थापित किए हैं इनकी ख़बर से डरें सहमे मतदाताओं और विजयी निर्दलीयों में भी नया हौसला जन्म ले रहा है।संभव है नगरपरिषद और जिला पंचायतों के अध्यक्ष चयन में इसका कुछ असर दिखे।
सबसे ख़तरनाक बात जो इस चुनाव में देखी गई है वह आप पार्टी का प्रवेश है संघ द्वारा पालित पोषित भाजपा की इस बी टीम को आम जनता ने इसे भाजपा के खिलाफ समझ कर वोट दिया है जबकि वह आप की असलियत से कोसों दूर है।इसी तरह ओबैसी की ओ आई एम एआई एम का भी यही रोल है उसकी जीत से बुरहानपुर नगरनिगम पर भाजपा सफल रही। निर्दलीय विजेताओं के प्रति शिवराज सरकार ने नरमी दिखाई है उन्हें भोजन पर बुलाकर।आम जनता को इन बिंदुओं पर समझाने की जरूरत है तभी कांग्रेस की इस विजय श्री 2023विधानसभा चुनाव में अच्छे से भुनाया जा सकता है। जहां तक माहौल का सवाल है वह भाजपा के विरुद्ध है ही। रतलाम में आपको याद होगा विजयी भाजपा प्रत्याशी प्रह्लाद पटेल ने चुनावी मंच पर कहा था कि जिनके घरों पर कांग्रेस का झंडा लगा है उसे नोट करो एक एक को देख लिया जाएगा।अब वे जीत गए हैं और मुख्यमंत्री जी ने सबसे पहले ट्वीट कर उन्हें बधाई भी दी है।इस भय से मुक्ति का एक ही रास्ता है वे निडर रहें।पांच नगरनिगम के निर्भीक मतदाताओं की तरह। उखास बात ये भी है चंबल, महाकौशल विन्धय क्षेत्र के बड़े नगरों में कांग्रेस की पहुंच कामयाब रही है भाजपा मालवांचल तक प्रभावी है।यह तिलस्म भी टूटेगा।विशेष यह भी देखने और सोचने की बात है कि इतनी हार के बावजूद भाजपा हार का जश्न मनाकर वोटरों और भक्तों को खुश कर रही है।यह सीखने की बात है।




