वृंदावन में मौजूद राधा वल्लभ जी और बांके बिहारी जी के मंदिर के बारे में तो ज्यादातर लोगों को पता होता है, जिनके दर्शन करने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में भक्त ब्रज पहुंचते हैं। लेकिन आज हम आपको वृंदावन में प्रकट हुए सातों ठाकुर जी के मंदिर से जुड़ी अहम जानकारियां देंगे।
भारत में विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित कई मंदिर हैं, जिनकी मान्यता और महत्व अद्भुत है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित श्री वृंदावन धाम को कृष्ण जी की लीला स्थली माना जाता है। जहां भगवान कृष्ण जी, राधा रानी, नंद बाबा और गोकुल वासी कई साल तक रहे थे। यहां पर कृष्ण जी और राधा रानी को समर्पित कई मंदिर हैं, जिनका इतिहास और मान्यता दोनों रोचक है। इसके अलावा वृंदावन में ठाकुर जी को समर्पित भी कई मंदिर हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वृंदावन में मौजूद ठाकुर जी की मूर्तियों को बनाया नहीं गया था, बल्कि सभी मूर्तियां स्वयं प्रकट हुई थीं। हालांकि औरंगजेब के शासन काल के दौरान वृंदावन के मंदिरों पर हमला किया गया था, जिसके बाद ठाकुर जी की मूर्तियों को देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित मंदिरों में स्थापित कर दिया था। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस समय वृंदावन और देश के भिन्न-भिन्न राज्य में ठाकुर जी किन-किन स्वरूप में कहां-कहां विराजमान हैं
बांके बिहारी जी
बांके बिहारी जी वृंदावन में विराजमान हैं। हालांकि मुगल आक्रमण के दौरान ठाकुर जी के भक्त उनकी मूर्ति को राजस्थान के भरतपुर लेकर चले गए थे, लेकिन बाद में उन्हें वृंदावन में विराजमान कर दिया गया था।
वृन्दावन के सात ठाकुर, जिन्हें सप्त देवालय भी कहा जाता है, वे श्री कृष्ण के सात विग्रह हैं जो वृन्दावन को विशेष बनाते हैं। इन ठाकुरों में गोविंद देव जी (अब जयपुर में), मदन मोहन जी (अब करौली में), गोपीनाथ जी (अब जयपुर में), राधा रमन जी, राधा दामोदर जी, राधा श्याम सुंदर जी और गोकुलानंद जी शामिल हैं।
वृन्दावन के सात ठाकुरों के नाम और स्थान:
- गोविंद देव जी:यह विग्रह अब जयपुर के राजकीय महल में स्थापित है।
- मदन मोहन जी:यह विग्रह अब करौली में है।
- गोपीनाथ जी:यह विग्रह भी जयपुर के राजकीय महल में स्थापित है।
- राधारमण जी:यह विग्रह श्री वृंदावन धाम में ही विराजमान हैं।
- राधाबल्लभ जी:यह विग्रह भी वृंदावन धाम में ही हैं।
- राधा दामोदर जी:यह ठाकुर वृंदावन के सप्त देवालयों में से एक हैं।
- राधा श्याम सुंदर जी:यह ठाकुर भी सप्त देवालयों का हिस्सा हैं।
अन्य ठाकुर:
- कभी-कभी जुगल किशोर जी (पन्ना में) और गोकुलानंद जी को भी इन सात ठाकुरों में गिना जाता है, जैसा कि कुछ संदर्भों में उल्लेख किया गया है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी विग्रह चैतन्य महाप्रभु के शिष्यों द्वारा वृन्दावन में स्थापित किए गए थे और इन्हें भक्तों के लिए साक्षात भगवान के रूप में पूजनीय माना जाता है।
राधा रमण जी
राधा रमण जी की मूर्ति आज भी वृंदावन में मौजूद है। माना जाता है कि औरंगजेब के शासन काल में राधा रमण जी के मंदिर पर भी हमला हुआ था, लेकिन ठाकुर जी के भक्तों ने उनकी मूर्ति को सुरक्षित छिपाकर रखा था।
राधा वल्लभ जी
राधा रमण जी के अलावा राधा वल्लभ जी की मूर्ति भी वृंदावन में मौजूद है। हालांकि हमले के दौरान राधा वल्लभ जी को राजस्थान लेकर जाया गया था, लेकिन बाद में उनकी मूर्ति को वापस वृंदावन में स्थापित कर दिया गया था।
गोविंद देव जी
गोविंद देव जी के स्वरूप में ठाकुर जी जयपुर के राजकीय मंदिर में विराजमान हैं। जहां रोजाना बड़ी संख्या में भक्त ठाकुर जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। दरअसल, ब्रज धाम पर औरंगजेब के शासन काल में हमला हुआ था। तब ठाकुर जी के भक्त उन्हें अपने साथ जयपुर लेकर चले गए थे।





