[ भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में पुलिस की गोली से मारे गये एप्पल कंपनी के एरिया मैंनेजर विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी आज उसी खून में डूब गई जिसका वह बढ़चढक़र समर्थन करती थी और भाजपाई गुंडों के हाथों मारे जाने वाले लोगों पर हंसती और हत्यारों का समर्थन सोशल व अन्य मीडिया के माध्यम से करती थी. सौशल मीडिया पर सक्रिय युवा फरीदी अल हसन तनवीर अपनी पैनी धार से यह बताने में सफल हुये हैं कि भाजपाई गुंडों का समर्थन करनेवाले भी भाजपाइयों के गुंडों से नहीं बच पायेंगे. उन्हें भी खून के आंसू रोना होगा. प्रस्तुत है यह आलेख ]
वो भक्तिन थी!
वो रोहित वेमुला की मौत पर हंसती थी!
वह भाजपा समर्थक थी!
वह अख़लाक़, पहलू, जुनैद, अफराज़ूल की हत्यायों का समर्थन करती थी!
वह कन्हैया को पीटे जाने, खालिद को देशद्रोही कहने और नजीब को गायब कर देने की हिमायती थी!
वह JNU शट डाउन को ट्रेंड करती थी.
उसने आसिफा के बलात्कार को कश्मीर ब्राह्मण के साथ हुए अत्याचार का बदला बता जस्टिफाई किया था.
वह चंदन गुप्ता जैसे दंगाई को शहीद का दर्जा दिलवाना चाहती थी.
उसने न केवल गौरी लंकेश की हत्या का जश्न मनाते ट्वीट्स को गर्व से वायरल किया था बल्कि वह सत्ताधारी सांसदों विधायकों के द्वारा अपनी ही धर्म और जाति की मासूम लड़कियों के बलात्कार के पाप को भी राष्ट्रवादी करार दिया करती थी.
वह शेल्टर हाउसेस की मासूम लड़कियों के यौन शोषण में लिप्त बृजेश ठाकुरों, मिश्रानियों, शर्माओ और तिवारियो के नामों को सामने के आने को ब्राह्मणवादी श्रेष्ठता पर एक हमला जैसा ही मानती थी. वह विक्टिम को ही दोषी ठहरा देने की हिमायती थी.
उसने खुद नेशनल टीवी पर क़ुबूल किया है कि वह ब्राह्मणवादी मनुवादी हिंदुत्ववादी दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों की समर्थक थी.
वह आधुनिक काल में रामराज्य की स्थापना की पक्षधर थी.
और फिर रामराज्य ने एक दिन उसका विवेक उससे छीन उसकी मांग में वैधव्य की राख भर दी.
रामराज्य की कल्पना में ही खोई रहने वाली ‘कल्पना’ आज अपने विवेक की हत्या के हर्जाने की कीमत में रामराज्य वाली सरकार से रूपईया एक करोड़ चाहती है !
योगी सरकार के मंत्री का बयान
चश्मदीद गवाह सना खान का बयानः
कल रात से पुलिस मेरे साथ है.. सिपाहियों ने अचानक से गाड़ी रुकवाई. विवेक सर ने सन्नाटे में गाड़ी नहीं रोकी,
बाइक के पहिए पर गाड़ी चढ़ गई, सामने से सिपाही ने गोली मार दी बिना कुछ कहे विवेक सर को गाली मार दी
विवेक के चिन पर गोली लगी थी, गोली मारकर दोनों पुलिसकर्मी फरार हो गए
गोली लगने के बाद गाड़ी आगे टकरा गई, अस्पताल में इलाज नहीं, बयान हो रहा था. मैं कल फोन नहीं ले गई थी, ट्रक वालों से फोन मांग रही थी कुछ देर में दोबारा पुलिस आई थी.
पुलिस एम्बुलेंस को कॉल कर रही थी, मैंने कहा पुलिस गाड़ी से ही ले चलो. पुलिस लोहिया अस्पताल विवेक सर को ले गई।।
मृतक विवेक तिवारी के बेटी का बयानः





