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पथरी : कारण, लक्षण और उपचार

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डॉ. प्रिया मानवी

  _गुर्दे और पित्ताशय (gall bladder) में कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन जैसी चीजों के जमने से पथरी की शिकायत हो जाती है|  समय पर इलाज ना कराया जाये तो गॉलब्लेडर में कैंसर भी हो सकता है|_
  गुर्दे या पित्त की पथरी मतलब गॉल्स्टोन जो पित्ताशय (gall bladder) की थैली में बनते हैं काफी दर्दनाक और भयावह स्थिति पैदा कर सकते हैं. टाइम से इलाज ना हो तो ऑपरेशन करने तक की नौबत आ जाती है.
   लगभग 80% पथरी कोलेस्ट्रॉल से ही बनती है। पित्त लिवर में बनता है और इसका संग्रह (collection) गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त फैटी भोजन को पचाने में मदद करता है। लेकिन जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तब पथरी बन जाती है|

लक्षण (Symptoms):
बदहजमी, खट्टी डकार, पेट फूलना, एसिडिटी, पेट में भारीपन, उल्टी, पसीना आना, असह्य दर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं।

*पथ्य :*

~पर्याप्त पानी
-नाशपाती
-खट्टे फल
-रोजाना एक चम्मच हल्दी
-सुबह खाली पेट 50 मि.ली. नींबू का रस पीना
-गाजर और ककड़ी के रस को 100 मि.ली. की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीना.
-एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रॉल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
-ज्यादा से ज्यादा मात्रा में हरी सब्जियां और फल खाना क्युकी इनमे कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है और प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।
-सर्वांगासन
-शलभासन
-धनुरासन
-भुजंगासन

घरेलू उपचार(Home Remedies):
1) सेब (Apple)-
एक गिलास सेब के रस में सेब साइडर सिरका का एक बड़ा चम्मच मिलाकर रोजाना दिन में एक बार खाना चाहिए। पित्ताशय की पथरी के लक्षण से आराम दिलाने में सेब का सिरका बहुत ही फायदेमंद होता है।
2) नाशपाती (Pear)-
नाशपाती में पेक्टिन नामक कंपाउंड होता है जो कोलेस्ट्रॉल से बनी पथरी को नरम बनाता है ताकि वे शरीर से आसानी से बाहर निकल सकें। और पथरी से होने वाले दर्द और अन्य लक्षणों में काफी फायदेमंद होता है|
3) चुकंदर, ककड़ी, और गाजर का रस (Beetroot, Cucumber, Carrot Juice)-
पित्ताशय की थैली को साफ और मजबूत करने और लीवर की सफाई के लिए चुकंदर , ककड़ी और गाजर के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर खाने से पेट और खून की सफाई में भी मदद करता है।
4) पुदीना (Mint)-
पुदीने में टेरपिन नामक कंपाउंड पाया जाता है जो प्रभावी रूप से पथरी को तोड़ता है। पुदीने की पत्तियों को उबालकर पिपरमेंट टी भी बना के पिया जा सकता है|
5) इसबगोल (Isabgol)-
इसबगोल पित्ताशय की थैली की पथरी के इलाज के लिए बहुत जरुरी है। इसबगोल पित्त में कोलेस्ट्रॉल को बांधता है और पथरी को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। इसे भोजन के साथ या रात को बिस्तर पर जाने से पहले एक गिलास पानी के साथ भी लिया जा सकते है।
6) नींबू (Lemon)-
नींबू का रस सिरके की तरह कार्य करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है। हर रोज खाली पेट चार नींबू का रस लें। इस प्रक्रिया को एक हफ्ते तक अपनाएं। इससे पथरी की समस्या आसानी से दूर हो सकती है।
7) लाल शिमला मिर्च (Red Capsicum)-
2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पथरी की समस्या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें।
8) हल्दी (Turmeric)-
हल्दी पित्ताशय की पथरी के लिए यह एक बढ़िया घरेलू उपचार है। यह एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेट्री होती है। हल्दी पथरी को आसानी से तोड़ने में मदद करती है। ऐसा माना जाता है कि एक चम्मच हल्दी लेने से लगभग 80 प्रतिशत पथरी खत्म हो जाती है।

  *आधुनिक चिकत्सा पद्धति (एलोपैथी) का दृष्टिकोण :*

प्रश्न 1. पित्त की पथरी क्या है?
पित्त की पथरी पित्ताशय में मौजूद पाचक द्रव (पित्त) का ठोसावस्था में जमा होना है। यह भारत में सामान्य आबादी के 10-20% को प्रभावित करने वाली एक बहुत ही सामान्य बीमारी है।

प्रश्न 2. पित्त की पथरी बनने के क्या कारण हैं?
यदि पित्ताशय में मौजूद पित्त में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल एंजाइम नहीं घुला पाता है तो यह ठोस बन कर पत्थर का आकार ले लेता है। इसके अलावा अगर पित्त में बहुत अधिक बिलीरुबिन होता है, जैसे यकृत के सिरोसिस या कुछ रक्त विकारों में तो यह पत्थर के गठन का कारक होता है। अंत में, यदि पित्ताशय अच्छी तरह से खाली नहीं होता है, तो इससे ठहराव और पत्थर का गठन होता है।

प्रश्न 3.क्या गुर्दे या पित्त में पत्थर बनने के कोई जोखिम कारक होते हैं?
40 वर्ष की आयु से अधिक महिलाओं में पित्त की पथरी देखी जाती है। मोटापा, गतिहीन जीवन शैली, अत्यधिक वसा युक्त लेकिन रेशे की कम मात्रा वाले आहार, मधुमेह और पित्त की पथरी के पारिवारिक इतिहास कुछ सामान्य जोखिम कारक हैं।

प्रश्न 4. पित्त पथरी के लक्षण क्या हैं?
पित्ताशय की पथरी ऐसे किसी भी लक्षण का कारण नहीं हो सकती है, जहां इसे मौन या संयोग से पहचाने गए पथरी के रूप में जाना जाता है। अन्यथा आम लक्षण में पेट के दाहिने हिस्से में पंजर के नीचे दर्द होता है। यह दर्द गंभीर हो सकता है और पीठ या दाएं कंधे तक फ़ैल सकता है। रोगी को पेट में भारीपन, मतली और उल्टी का अनुभव होता है जो भोजन करने के ठीक बाद और ज्यादा हों जाता है। यदि पथरी पित्त नली में खिसकता है तो पीलिया या तेज बुखार हो सकता है।

प्रश्न 5. गुर्दे या पित्त की पथरी के इलाज की किन्हें आवश्यकता है?
हर किसी को पथरी के इलाज की आवश्यता नहीं होती है। मूक पथरी को बारीक़ निरीक्षण में रखा जा सकता है। अन्य सभी रोगियों को जिन्हें पित्त की पथरी से संबंधित लक्षण (दर्द, बुखार, पीलिया, अग्नाशय में सूजन) अनुभव हुए हैं उन्हें चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। पित्त की पथरी और पित्ताशय के कैंसर के इतिहास वाले व्यक्तियों और परिवारों को भी उपचार की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 6. गुर्दे या पित्त की पथरी का इलाज क्या है?
गुर्दे की पथरी के लिए सर्जरी ज़रूरी नहीं होती.
पित्त की पथरी का उपचार आमतौर पर शल्यचिकित्सा द्वारा किया जाता है जिसमें पित्ताशय को शरीर से निकाल दिया जाता है (कोलेसीस्टेक्टॉमी)। यह एक लेप्रोस्कोपिक या कीहोल सर्जरी है जिसमें पेट में छोटे छेद के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की जाती है। पित्त की पथरी को खत्म करने के लिए आमतौर पर अन्य कोई उपचार प्रभावी नहीं होता है।

प्रश्न 7. क्या किसी भी पथरी के बनने के जोखिम को कम किया जा सकता है?
हाँ!! एक उचित वजन बनाए रखना पित्त की पथरी को कम करने का सबसे सही तरीका है। नियमित व्यायाम और कम कैलोरी वाला आहार पथरी को दूर रखने में मदद करता है। भोजन को ना करने से बचें क्योंकि इससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जो लोग अपना वजन कम करने का इरादा रखते हैं, वे इसे बहुत तेज़ी से नहीं करें। आपका लक्ष्य 500 ग्राम से 1 किलोग्राम/सप्ताह कम करना होना चाहिये।

  पथरी के आकार पर ये निर्भर करता है कि उसे दवा से निकालना है या सर्जरी से। आमतौर पर छोटी पथरी को निकालने के लिए दवाओं का इस्‍तेमाल किया जाता है। हालांकि, बहुत कम ही ऐसा होता है जब दवाएं पथरी में बहुत असरकारी हों।
 _इसमें इलाज बंद करने पर पथरी दोबारा होने का खतरा रहता है। ऐसे मामलों और पथरी का आकार बड़ा होने पर सर्जरी सबसे असरकारी विकल्‍प है।_

होम्‍योपैथी उपचार :
यह उपचार सर्जरी का बेहतर विकल्‍प बनता है। कार्डुअस मैरियेनस, कैल्केरिया कार्बोनिका, फेल टौरी और कई दवाओं का सफलतापूर्वक इस्‍तेमाल किया गया है।
इन दवाओं से इलाज के बाद पथरी के दोबारा होने के मामले भी अब तक नहीं देखे गए हैं। दवाएं सिम्टम्स के अनुसार सेलेक्ट की जाती हैं, इसलिए डॉक्टर के निर्देशन में प्रयोग करना चाहिए.

बैप्‍टिसिया टिंक्‍टोरिया (Baptisia Tinctoria)
लक्षण : इस दवा का इस्‍तेमाल टाइफाइड में किया जाता है। इसके अलावा पेट के दाईं ओर दर्द, पित्ताशय के आसपास घाव, दस्‍त, लीवर के आसपास घाव और दर्द जैसे लक्षणों का इलाज भी इससे किया जा सकता है।
बंद कमरे में रहने, गर्म और उमस भरे मौसम में रहने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है। धुंध के मौसम में भी पथरी का दर्द उठ सकता है।

:बर्बेरिस वल्गैरिस (Berberis Vulgaris)
लक्षण : किडनी के आसपास दर्द होने की स्थितियों और पित्त रस के स्राव से जुड़े लक्षणों में इस दवा का इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा निम्‍न लक्षणों को कम करने के लिए ये दवा दी जाती है :
पित्ताशय के आसपास वाले हिस्‍से में टांके लगने जैसा दर्द होना
लीवर के आसपास दर्द और इस दर्द का पेट की ओर बढ़ना
रंग पीला पड़ना (पीलिया)
कब्‍ज
इन स्थितियों की वजह से मूत्र प्रणाली से जुड़े लक्षण भी दिख सकते हैं। खड़े होने या किसी प्रकार की गतिविधि करने पर ये लक्षण और बिगड़ सकते हैं।

ब्रायोनिया अल्बा (Bryonia Alba)
आमतौर पर गतिविधि करने पर बढ़ने वाले दर्द के इलाज के लिए इस दवा की सलाह दी जाती है। ये सांवले रंग के लोगों के लिए सबसे असरकारी है और शाम के समय गर्म जगहों पर इसका असर ज्‍यादा होता है। निम्‍न लक्षणों को भी इस दवा से ठीक किया जा सकता है :
लीवर के आसपास वाले हिस्‍से में सूजन
पेट के आसपास दर्द के साथ जलन महसूस होना
कब्‍ज के साथ सुबह के समय दर्द का बढ़ जाना
इस स्थिति से ग्रस्‍त व्‍यक्‍ति को सुबह के समय, गर्म मौसम में और थकान होने पर दर्द ज्‍यादा महसूस होता है, जबकि ठंड और हल्‍का-सा दबाव कम होने पर दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है।

कार्डुअस मैरियेनस (Carduus Marianus)
लक्षण : कार्डुअस मैरियेनस एक सामान्‍य दवा है, जिसका इस्‍तेमाल पीलिया और लीवर से जुड़े लक्षणों के इलाज में किया जाता है। ये निम्‍न लक्षणों से भी राहत दिलाने में मदद करती है :
लीवर में दर्द होना
कभी कब्‍ज तो कभी दस्‍त होना
पित्ताशय में दर्द और सूजन

कैल्‍केरिया कार्बोनिका (Calcarea Carbonica)
लक्षण : ये दवा उन लोगों को दी जाती है, जिन्‍हें आसानी से ठंड लग जाती है और मोटापे से ग्रस्‍त होने के साथ जिनकी त्‍वचा पीली है। ऐसे लोगों में इस तरह के सामान्‍य लक्षण भी दिखाई देते हैं :
पेट पर आसानी से दबाव महसूस होना
लीवर में हल्‍के दबाव के साथ दर्द का अहसास
पथरी का दर्द बहुत तेज होना
पेट में तेज दर्द और सूजन
ठंडे मौसम या कुछ भी ठंडा खाने पर दर्द बढ़ना, शुष्‍क मौसम में दर्द कम हो जाता है।

चेलिडोनियम मेजस (Chelidonium Majus)
लक्षण : पीलिया और लीवर से जुड़ी बीमारियों के लिए चेलिडोनियम मेजस की सलाह दी जाती है। इसके अलावा इस दवा से निम्‍न लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :
पित्ताशय में तेज दर्द
पित्ताशय और लीवर के आसपास सूजन
मौसम बदलने के साथ सुबह के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। रात को खाना खाने के बाद और प्रभावित हिस्‍से पर हल्‍का-सा दबाव बनाने पर व्‍यक्‍ति को बेहतर महसूस होता है।

कोलेस्टेरिनम (Cholesterinum)
:लक्षण : पेट के आसपास जलन के साथ दर्द, पीलिया, पित्ताशय में पथरी के कारण दर्द के इलाज में भी इस दवा का इस्‍तेमाल किया जाता है।

मेडोराइनम (Medorrhinum)
लक्षण : नीचे बताए सामान्‍य लक्षणों में भी मेडोराइनम की जरूरत पड़ती है:
लीवर में पीड़ादायक दर्द होना
मीठा खाने का मन करना
भूल जाना
पेट के बल लेटने पर दर्द कम होता है।
जिन लोगों पर मेडोराइनम असर करती है, जब वो अपनी स्थिति के बारे में सोचते हैं तो उनके लक्षण और खराब हो जाते हैं। अक्‍सर दर्द दिन के समय होता है और सूर्य अस्‍त होने पर ठीक हो जाता है। नमी और ठंडे मौसम में एवं समुद्र तट के पास दर्द से राहत महसूस होती है।

🎇आयुर्वेदिक औषधीय योग :

सेब का रस और सिरका :
बेशक, सेब डॉक्टर को दूर रखने में मदद करता है. इसलिए एक गिलास सेब के रस में सेब साइडर सिरका का एक बड़ा चम्मच मिलाकर नियमित रूप दिन में एक बार सेवन करना चाहिए. सेब में मेलिक एसिड होता है जो पित्त पथरी नरमी में सहायता करता है और सिरका पत्थर के कारण कोलेस्ट्रॉल बनाने से लीवर को रोकता है. यह एक पित्त की पथरी के हमले के दौरान दर्द को कम करने एक त्वरित उपाय है.
सिंहपर्णी :
सिंहपर्णी के पत्ते लीवर का समर्थन, मूत्राशय के कामकाज में सहायता, पित्त उत्सर्जन को बढ़ावा, और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. एक कप पानी में एक बड़ा चम्‍मच सिंहपर्णी के पत्तों को मिलाये. फिर इसे अवशोषित करने के‍ लिये पांच मिनट के लिए रख दें. अब इसमें एक चम्‍मच शहद मिलाये. मधुमेह रोगियों को इस उपचार से बचना चाहिए.
नींबू का रस :
नींबू का रस प्रकृतिक रूप से अम्लीय होने के कारण यह सिरके की तरह कार्य करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है. हर रोज खाली पेट चार नींबू का रस लें. इस प्रक्रिया को एक हफ्ते तक अपनाएं. इससे पथरी की समस्या आसानी से दूर हो सकती है.
वाइन :
शोधकर्ताओं ने पाया कि 1/2 गिलास वाइन पित्त की पथरी के हमलों को लगभग चालीस प्रतिशत तक कम कर सकता है. इसलिए वाइन के एक गिलास को अपनी दिनचर्या में शमिल करें इससे ज्यादा नहीं.

गुडहल का पाउडर :
एक चम्मच रात को सोते समय खाना खाने के कम से कम एक डेढ़ घंटा बाद गर्म पानी के साथ फांक लीजिए। ये थोडा कड़वा होता है। इसलिए मन भी कठोर कर के रखें, लेकिन ये इतना भी कड़वा नहीं होता के आप इसको खा ना सकें। इसको खाना बिलकुल आसान है।
इसके बाद कुछ भी खाना या पीना नहीं है। यदि स्टोन का साइज़ बहुत बड़ा हो तो पहले दो दिन रात को ये पाउडर लेने के बाद सीने में अचानक बहुत तेज़ दर्द हो सकता है। मगर ये दर्द स्टोन के टूटने होता है। और दो दिन बाद से ये दर्द गायब सा हो जाता है। वहीं 5 दिन के बाद तो ये बिलकुल भी नहीं रहता।
गाल ब्लैडर पथरी निकलवाने में सामान्य तौर पर डॉक्टर तो 5000 से लेकर 10000रुपए तक चार्ज करते हैं। जबकि आयुर्वेद में इस प्रयोग की वास्तविक कीमत सिर्फ 50 रुपए के आसपास ही है। यह प्रयोग गाल ब्लैडर और किडनी दोनों प्रकार के स्टोन को निकालने में बेहद कारगर है।
ये रखें सावधानी :
इस दौरान पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर आपका स्टोन बड़ा है तो ये टूटने समय दर्द भी कर सकता है।
ऐसे मिलेगी ये औषधि :
गुडहल के फूलों का पाउडर को इंग्लिश में Hibiscus powder कहते हैं। ये पाउडर बहुत आसानी से पंसारी से मिल जाता है। अगर आप इंटरनेट पर भी Hibiscus powder नाम से सर्च करेंगे तो आपको अनेक जगह ये पाउडर online मिल जाएगा,वहीं जब आप online इसको मंगवाए तो इसको organic hibiscus powder देखिएगा।
आज कल बहुत सारी कंपनिया आर्गेनिक भी ला रहीं हैं जो इसके लिए बेस्ट माना जाता है। कुल मिला कर बात ये है के इसकी उपलबध्ता बिलकुल आसान है।
मात्र 15 दिन हमारे सानिध्य में रहकर निःशुल्क रोगमुक्त हुआ जा सकता है.
(चेतना विकास मिशन) :

Ramswaroop Mantri

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