दिल्ली के सबसे नए सांस्कृतिक आकर्षण, हुमायूँ के मकबरे के विश्व धरोहर स्थल संग्रहालय में, आप इतिहास से बिल्कुल नए स्तर पर, सचमुच, सबक ले सकते हैं। भूमिगत होने के कारण इसे ‘डूबे हुए संग्रहालय’ के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ मुगल काल की 500 से ज़्यादा अनदेखी कलाकृतियाँ रखी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय संग्रहालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और आगा खान संस्कृति ट्रस्ट (AKTC) ने 25 वर्षों से बड़ी मेहनत से संरक्षित किया है। देश में अपनी तरह का यह पहला संग्रहालय 1 लाख वर्ग फुट [10,000 वर्ग मीटर] में फैला है। संग्रहालय में 100 सीटों वाला एक सभागार, अस्थायी दीर्घाएँ, कैफ़े, बैठक कक्ष, एक पुस्तकालय और अन्य सुविधाएँ भी शामिल हैं। संग्रहालय का मुख्य आकर्षण 18 फुट ऊंचा स्वर्ण कलश है, जो कभी हुमायूं के मकबरे के गुंबद की शोभा बढ़ाता था, लेकिन 2014 में आए तूफान में टूट गया था। अब पारंपरिक ताम्रकारों द्वारा इसकी मरम्मत की गई है और इसे संग्रहालय के अंदर रखा गया है।
इस पूरे म्यूजियम में सबसे खूबसूरत सोने का कलश है, जिसे 1570 का बताया जाता है. कहते हैं कि यह सोने का कलश तांबे और सोने से मिलाकर बनाया गया है. इसकी लंबाई 6 फीट से ज्यादा है. इसके ऊपर चांद लगा हुआ है और उसकी खूबसूरती देखते ही बनती है. इसका वजन भी काफी भारी है.

इसके बाद बात करें हुमायूं के सिर पर सजे हुए ताज की हुमायूं की टोपी आपने फोटो में देखी होगी. वहीं, असली टोपी इस म्यूजियम में रखी हुई है, जिसे कहते हैं ताज-ए- इज्जत. आपको जानकर हैरानी होगी कि उस वक्त में इसे सूती कपड़े से बनाया गया था और जरदोजी की कढ़ाई की गई थी. असली सोने और चांदी के धागों से इसे सिला गया है. इस पर जो डिजाइन है. वो सोने चांदी के धागों से की गई है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि सोने का कवच पहन कर मुगलकालीन जो सैनिक थे, वो लड़ाई लड़ते थे. यहां पर मुगल काल के सोने के कवच रखे गए हैं, जिसे युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया जाता था. खुद की सुरक्षा के लिए, जिसमें सोने का हेलमेट, सोने की तलवार और सोने का एक कवच है, जिस तरह आज बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी जाती है. उसी तरह इसे पहना जाता था. यह भी हुमायूं के म्यूजियम में रखा हुआ है.
हुमायूं के म्यूजियम के अंदर हुमायूं के वक्त पर नीली छतरी और नदी के किनारे के मंडप में इस्तेमाल होने वाली टाइल्स रखी हुई है. यह टाइल्स इतनी खूबसूरत हैं कि आप देखकर हैरान हो जाएंगे. इतनी खूबसूरत टाइल्स आज के जमाने में नहीं मिलती हैं. ये टाइल्स रंग बिरंगी डिजाइनिंग टाइल्स हैं, जिसे हुमायूं को पसंद करता था.

<br />हुमायूं के म्यूजियम में तांबे और सोने की बनी हुई सुराही रखी हुई है. इन सुराही के बारे में कहा जाता है कि मुगल बादशाह हुमायूं के साथ 25 सालों तक रही. यही सुराही तांबे और सोने से बनाई गई हैं. कहते हैं गंगा जमुनी पानी का लोटा और सुराही हुमायूं को बहुत पसंद थे इसलिए म्यूजियम में आज तक इन्हें सुरक्षित रखा गया है

इसी म्यूजियम के अंदर हुमायूं के वक्त के औजार रखे हुए हैं. यह छोटे-छोटे औजार हुमायूं के वक्त पर घरों के निर्माण से लेकर तमाम तरह के कामों में इस्तेमाल किए जाते थे. इन औजारों को भी देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.

हुमायूं के म्यूजियम में 19वीं शताब्दी का एक मशक रखा हुआ है. मशक यानी बकरे की खाल का बना हुआ ऐसा अनोखा बैग जिसके अंदर 25 लीटर तक का पानी आ जाता है. 19वीं शताब्दी में लोग इसका इस्तेमाल दरगाह में आने जाने वालों की सेवा करने के लिए किया करते थे. उनको पानी पिलाया करते थे. यह पूरी तरह से बकरे की खाल का बना होता और 25 लीटर पानी में आ जाता है





