अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

स्त्री का है रूप कुछ ऐसा,अपनी ओर सबको खींचे

Share

स्त्री के मन की गहराई
स्वयं स्त्री ही जाने
आ जाए यदि हृदय किसी पर
फिर न किसी की माने ।।
स्त्री का है रूप कुछ ऐसा
अपनी ओर सबको खींचे
चाहे कितना बड़ा साधक हो
एक पल न आँखें मींचे ।।
स्त्री जब पतिव्रता हो जाती
पति ऊंचाई पाता
जब वो व्यभिचारी बन जाए
सब रसातल में जाता ।।
चरित्र देश ने उत्तम माना
जो चरित्रवान बन जाए
गिर जाये चाहे भले गोबर में
फिर भी कीमत पाये ।।
एक पुरुष नारी के मन को
कभी नहीं पढ़ पाया
नारी का है रूप विचित्र
मादक ममता माया ।।

 नेह रागिनी, कवियत्री, ग्वालियर 

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें