सुसंस्कृति परिहार
कभी कभी यकीन नहीं होता कि हमारे पी एम साहिबान का पूरे ग्लोबाईज़ेशन पर इतना जबरदस्त रिलेशन है कि वाकई वे विश्व गुरु ही नज़र आते हैं।वे जहां जाते हैं वहां वहां उनके सदियों पुराने नाते रिश्तेदार निकल आते हैं। पाकिस्तान में ही देखिए लोग कहते वे बिरियानी खाने अचानक पहुंच गए थे।ना बाबा ना वे तो अपने किसी पुराने नाते रिश्ते में गए थे।बाकायदा साड़ी ,शाल वगैरह लेकर।साथ ही शादी में शरीक हो गए। अब निकालते रहिए विश्व गुरु की खामियां।
अब देखिए एक हैरतंगेज ख़बर जब 2014 में प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद नरेंद्र मोदी जी नेपाल दौरे पर गए थे। याद है ना उनके साथ यहां जीत बहादुर भी गया था। बताया गया ये वही नौजवान है, जो 12 साल पहले अपने बचपन में घर वालों से बिछड़कर अहमदाबाद जा पहुंचा था किस्मत से इसकी मुलाकात मोदी से हो गई थी।जब मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो अपनी पहली नेपाल यात्रा में इस नौजवान को भी नेपाल ले आए और उसके परिवार वालों से मिलाया।इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री होते हुए कोई प्रयास नहीं किया।जबकि एक साधारण व्यक्ति भी किसी अनजान की घर वापसी के लिए पुलिस को सूचित करता है।किसी मसीहा की तरह मोदी जी ने इस नौजवान को उसके परिवार वालों से मिलाया। परिवार को उसका बेटा सौंपा तो ढेर सारा उपहार भी दिया ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में एक मां को अनमोल तोहफा दिया। उसके बिछड़े बेटे से मिलवा दिया। उस बेटे से, जिसे जन्म तो उसकी मां ने दिया, लेकिन पाला नरेंद्र मोदी ने।

इस बार उन्होंने अपनी मां हीराबेन के सौवें जन्मदिन पर उनके चरण धोए उनका भरपूर आशीष लिया और अपने ट्यूटर पर एक अचरज भरी कहानी सुना दी।मोदी साहिब ने बताया कि उनके घर में उनके साथ बचपन से मित्र अब्बास रहते थे।वे पास के गांव के थे । गांव का नाम और उनके पिता का नाम नहीं लिखा।अब्बास के पिता मोदीजी के पिताजी के परम मित्र थे वे जब अचानक गुजर गए तो अब्बास उनके घर में रहने लगे।मेरी मां हम सब बच्चों को पालने लगीं।बड़े उत्साहपूर्वक वे लिखते हैं ईद वगैरह में मेरी मां अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं।क्या बनाती थी ये तो नहीं पूछा जा सकता लेकिन दूसरे के घरों में बर्तन मांजकर अपने बच्चों को पालने वाली मां की दरियादिली का क्या कहना? नेपाली लड़का जगत बहादुर को मोदी जी ने अहमदाबाद में बी बी ए पढ़ाया।अब्बास को माताजी ने इतना पाल पोस के बड़ा किया कि सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी ने अपने जिस दोस्त अब्बास का जिक्र किया था। आजतक ने उनका पता लगा लिया है। अब्बास इस समय ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में अपने छोटे बेटे के पास रहते हैं। उनके दो बेटे हैं। छोटा बेटा ऑस्ट्रेलिया तो बड़ा बेटा गुजरात के कासीम्पा गांव में रहता है। अब्बास गुजरात सरकार में क्लास 2 कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। वो फूड एंड सप्लाई विभाग में थे। कुछ महीने पहले ही वे रिटायर हुए हैं। आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में अपने परिवारजनों के साथ शानदार ज़िंदगी जी रहा है।अब्बास का एक चित्र भी जारी किया गया है जिसे लोग संदेहास्पद बता रहे हैं।क्योंकि आजतक कभी इसकी चर्चा नहीं आई।
जाने क्यों लोग उन्हें संदेहास्पद नज़र से देखते हैं लोग कह रहे हैं कि भारत में मुस्लिम विरोध को देखते हुए अब्बास जिसका मतलब उर्दू में सुंदर और आकर्षक होता है तथा हिंदी में शेर या सिंह होता है नामक नया शिगूफा छोड़ा है। संदेह छोड़िए पता लगाइए हमारे साहिब अनजाने में ना जाने कितने लोगों की गुपचुप मदद में लगे हों।वे तो कुछ भावुक क्षणों में यूं ही सामने आ जाते हैं। बात तो तब बेहतरीन होगी जब मोदीजी की संवेदनशीलता के छुपे रहस्य हम सामने लाएं। वे महान हैं उनका परिवार समाजसेवी है।आखिरकार प्रधानमंत्री जी की ये कहानियां आज विपरीत परिस्थितियों में नहीं तो कब सामने आएंगी? राहुल गांधी इस महान शख्सियत को शायद नहीं समझ पाए हैं इसलिए उन्हें “हम दो हमारे
दो” के लघु दायरे में रखे हुए हैं।
उनके देश और विदेश में फैले तमाम इन सुमधुर रिश्तों पर विश्वविद्यालयों को पी एच डी करानी चाहिए।जो आगे चलकर देश के लिए प्रेरणास्पद होगी।यह मोदीजी के लिए खासतौर पर विश्वगुरु बनाने में भी इतिहास रचेगी। वसुधैव कुटुंबकम् को भी सार्थकता प्रदान करेगी।




