मध्य प्रदेश के ‘घंटा’ मंत्री पत्रकारों को हड़काने के आदी रहे हैं और मध्य प्रदेश के पत्रकार भी इतने अभ्यस्त हो गए हैं कि वे उनकी बदतमीजी खुशी-खुशी झेल जाते हैं। इसीलिए मंत्री जी को कभी भी खेद व्यक्त नहीं करना पड़ता है। एनडीटीवी के रिपोर्टर से भी उन्होंने अपनी आदत के मुताबिक ही बदतमीजी की, लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हो गया कि उनसे गलत नंबर डॉयल हो गया है।
अनिल जैन
दरअसल घंटा बजाते वक्त वे भूल गए कि एनडीटीवी का मालिक अब अ’दाणी सेठ है। घंटा बजाने के बाद शायद उन्हें अहसास हुआ या उनके किसी चंपू ने उन्हें इस बात से अवगत कराया। सेठजी का नाम आते ही उन्हें मामले की गंभीरता का अहसास हुआ और उन्होंने अपने स्वभाव के विपरीत ‘घंटानाद’ करने के लिए खेद जता दिया। गौरतलब है कि उन्होंने एनडीटीवी के रिपोर्टर से माफी नहीं मांगी है।
कुछ साल पहले उन्होंने एक टीवी डिबेट में अर्नब गोस्वामी से भी कहा था कि तुम्हारे जैसे चैनल न तो पांच वोट बढ़ा सकते हैं और न ही पांच वोट घटा सकते हैं। उनकी इस बात का अर्नब ने जरा भी बुरा नहीं माना था, क्योंकि वह जानता था कि कैलास विजयवर्गीय ने जो कहा है वह बिल्कुल सही है। इसके अलावा भी विजयवर्गीय कई बार टीवी चैनलों पर डिबेट और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों को यह ‘ऑथेंटिक’ जानकारी दे चुके हैं कि ”मैं तुम्हारी और तुम्हारे मालिक की औकात अच्छी तरह जानता हूं।’’ सचमुच वे ज्यादातर की औकात जानते भी हैं, इसलिए कोई पत्रकार उनकी बात का प्रतिकार नहीं करता है।
अलबत्ता कुछ साल पहले एक टीवी डिबेट में वे मेरे मित्र अशोक वानखड़े Ashok Wankhede से भी ऐसा ही कुछ कहने की गलती कर बैठे थे, लेकिन अशोक ने तत्काल हूबहू उसी शैली में ऐसा पलटवार किया था कि उन्हें बाद में अशोक से माफी मांगनी पड़ी थी।
दरअसल पहले कैलास विजयवर्गीय सत्ता के नशे में धुत्त होकर पत्रकारों से बदसुलूकी करते थे। वे सत्ता में तो अभी भी हैं लेकिन अब उनकी हनक लगभग खत्म हो चुकी है। उनकी हसरत मुख्यमंत्री बनने की थी लेकिन मुख्यमंत्री उस व्यक्ति को बना दिया गया जिसे विजयवर्गीय अपना पट्ठा समझते थे।
जब पट्ठे की सरकार में उस्ताद मंत्री हो तो समझा जा सकता है कि पार्टी और प्रशासनिक हलकों में उसकी हैसियत क्या होगी! सो, हालत यह है कि बाकी प्रदेश में तो दूर उनके अपने गृह नगर इंदौर में ही कोई भी अफसर उनकी सुनता नहीं है। इस बात का इजहार वे खुद कई बार सार्वजनिक तौर पर कर चुके हैं। कुल मिला कर इन सब बातों को लेकर वे इन दिनों बुरी तरह फ्रस्ट्रेटेड हैं और उसी फ्रस्टेशन में उनसे ‘घंटानाद’ हो गया।





