अग्नि आलोक
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आज की नारी है सभी पर भारी 

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सुनंदा गावंडे बुरहानपुर म.प्र

आज की नारी है सभी पर भारी
नव युग की नव रचियता कलमकारी।

श्रध्दा सुमन जिसके पगतल पर
प्रेम आरूढ है जिसके ह्दय पर

नैतिकता जिसके खून मे भरी
ऐसी वो जगत-जननी भारी।

धरा से लेकर गगन तक जिसके सूर बोले जिसके गीतो पर जग ये डोले।

आज हर पग पर नव कीर्तिमान रचती।
सुदंरता से लेकर भारतोलन को गढ़ती।

ईश कृपा पाने को तुम कन्या
पग को पूजते ।
कन्या बड़ी हुई तो पग-पग
क्यो रख दिये शूल चूभते।
अपनी बेटी के समान ही
दूसरी का भी ध्यान दो।
घर- बाहर हर जगह नारी
का सम्मान करो।

किस्मत छीन नही सकते तुम
तुम्हे मिला इतना अधिकार नही।
ईष्या से होगा कोई लाभ नही।
योग्य नारीयाॅ बढ़ती जाये।
देश का सम्मान यही।

आज की नारी अबला है ना बेचारी।
सशक्त भारत को गढ़ती देखो आज नारी।।

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