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एनकाउंटर सवालों में:एनकाउंटर पर पुलिस चुप, टीम लीड करने वाले अफसर का ट्रांसफर

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हरियाणा के नूंह में 31 जुलाई को भड़की हिंसा को 23 दिन हो चुके हैं। अब तक 61 FIR दर्ज हुई हैं, 280 लोग अरेस्ट किए गए हैं। पुलिस ने दो एनकाउंटर भी किए हैं। पहला एनकाउंटर हिंसा के 10 दिन बाद यानी 10 अगस्त को सिलखो गांव में अरावली की पहाड़ियों पर हुआ। दूसरा एनकाउंटर भी इन्हीं पहाड़ियों में 21 अगस्त की रात 10:30 बजे हुआ। इसमें आमिर नाम के आरोपी को पैर में गोली लगी है।

10 अगस्त को एनकाउंटर के बाद पुलिस ने दंगे के दो आरोपियों मुनफेद और सैकुल को अरेस्ट किया, मुनफेद को पैर में गोली लगी है। हालांकि एनकाउंटर वाली जगह के पास रहने वाले लोग और आरोपियों के परिवार इस मुठभेड़ को फर्जी बता रहे हैं।

26 साल का मुनफेद और 28 साल का सैकुल कौन हैं, उनके एनकाउंटर पर पुलिस क्या कहती है और परिवार का दावा क्या है, ये जानने हम ग्वारका गांव गए। मुनफेद और सैकुल इसी गांव में रहते हैं। रिश्ते में दोनों चाचा-भतीजा हैं। हम नल्हड़ भी गए, जहां मुनफेद की पत्नी रहती है। पढ़िए ये रिपोर्ट…

एनकाउंटर वाली जगह से राजस्थान बॉर्डर सिर्फ 3 किमी दूर
पुलिस का दावा है कि 10 अगस्त को मुनफेद और सैकुल राजस्थान से आ रहे थे। नूंह दंगों के बाद से दोनों राजस्थान में ही छिपे थे। पुलिस ने उनसे पूछताछ के बारे में कुछ नहीं बताया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि पुलिस जुनैद और नासिर के परिवार से दोनों का लिंक तलाश रही है।

जुनैद और नासिर की 15 फरवरी, 2023 को गौ-तस्करी के शक में हत्या कर दी गई थी। दोनों राजस्थान के भरतपुर के घाटमीका गांव के रहने वाले थे। नासिर-जुनैद हत्याकांड में मोनू मानेसर आरोपी है, जिस पर नूंह दंगे से पहले भड़काऊ वीडियो जारी करने का आरोप है।

हरियाणा पुलिस मुनफेद और सैकुल की गिरफ्तारी को बड़ी उपलब्धि मान रही है। पुलिस का दावा है कि दोनों को सिलखो गांव से पकड़ा गया। ये गांव चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा है। यहां से करीब डेढ़ किमी दूर नूरपुर गांव है। इस गांव के बाद राजस्थान की सीमा शुरू होती है। पहाड़ियां होने की वजह से इस इलाके में भारी मात्रा में माइनिंग होती है।

राजस्थान और हरियाणा के ट्रक लगातार इस बॉर्डर से आते-जाते हैं। मतलब दो कदम आगे बढ़ाकर आप राजस्थान में खड़े हो सकते हैं और दो कदम पीछे आकर हरियाणा में।

पुलिस का दावा- एक घंटे तक गोलियां चलीं, गांववाले बोले- आवाज नहीं सुनी
सिलखो गांव की शुरुआत में पुलिस का नाका था। नूंह हिंसा के बाद से लगा कर्फ्यू 12 अगस्त को हटा और 17 अगस्त को नाका भी हटा दिया गया। पुलिस के मुताबिक, मुनफेद और सैकुल की गिरफ्तारी नाके से करीब 300 मीटर दूर पहाड़ी पर हुई।

सिलखो गांव के बाहर पहले इसी जगह नाका था। पुलिस के मुताबिक, मुनफेद और सैकुल से इसी जगह मुठभेड़ हुई थी।

सिलखो गांव के बाहर पहले इसी जगह नाका था। पुलिस के मुताबिक, मुनफेद और सैकुल से इसी जगह मुठभेड़ हुई थी।

गांव के लोग बताते हैं कि दोनों को नाके के पास से पकड़ा गया। हालांकि ज्यादातर लोग कैमरे पर नहीं आना चाहते। सिलखो गांव के शाकिर बात करने के लिए तैयार हो गए। वे कहते हैं, ‘दोनों आरोपी बाइक पर थे। पुलिस ने उनका पीछा किया और एक गोली मारी।’

हमने कहा- लेकिन पुलिस तो कह रही है एक घंटे तक फायरिंग हुई। शाकिर ने जवाब दिया, ‘नहीं, कोई फायरिंग नहीं हुई। सिर्फ एक गोली की आवाज आई थी।’

गांव के ही असलम नूंह दंगों का जिक्र होते ही बोलने से बचने लगते हैं। कहते हैं- मुझे नहीं पता गांव से दो लोगों को पुलिस ने पकड़ा है।

उनसे पूछा कि क्या आपने गोलियों की आवाज सुनी थी, तो जवाब था- ‘नहीं-नहीं, हमारे गांव में गोलियां चली ही नहीं।’

गांव में रहने वाले एक ट्रक ड्राइवर से हमने एनकाउंटर पर बात की। पूछा कि आपने 10 अगस्त को गोलियों की आवाज सुनी थी? जवाब मिला- ‘नहीं। हमें नाके से पता चला कि दो बाइकसवारों को पुलिस ने उठा लिया है। गोली की आवाज दूसरे दिन सुबह सुनाई दी। अगर एक घंटे तक गोलियां चलतीं, तो सुनाई तो देता। पूरा गांव भले कर्फ्यू की वजह से घरों में था, पर कानों में थोड़ी न धारा-144 लगी थी।’

मुनफेद के पिता बोले- पुलिस ने गिरफ्तार किया, फिर अगले दिन गोली मारी
सिलखो से हम मुनफेद के गांव ग्वारका पहुंचे। ये गांव सिलखो से करीब 3 किमी दूर है। मुनफेद के घर में हमें उसके पिता जैकम, मां, दादी और चाचा शौकीन मिले।

पिता जैकम ने बताया, ‘मुनफेद 9 अगस्त को दोस्तों से मिलने सिलखो गया था। कर्फ्यू लगा था, इसलिए लौटने के लिए उसने सैकुल को दोपहर करीब 2-3 बजे बाइक लेकर बुलाया। सैकुल रिश्ते में उसका चाचा लगता है। वहीं से दोनों को पुलिस ने उठा लिया, लेकिन एनकाउंटर नहीं हुआ।’

आपको कैसे पता कि एनकाउंटर नहीं हुआ? जवाब मिला- ‘मुनफेद की पेशी वाले दिन उसके चाचा मिलने गए थे। मुनफेद ने बताया कि हम लोग बाइक से आ रहे थे, तभी पुलिस ने पकड़ लिया। दूसरे दिन आंखों पर पट्टी बांधकर ले गए। सिलखों की पहाड़ी या फिर नाके पर उसे गोली मार दी। फिर नल्हड़ हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया।’

मुनफेद के पिता जैकम कहते हैं कि बेटे के एनकाउंटर की बात गलत है, उसे गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने गोली मारी है।

मुनफेद के पिता जैकम कहते हैं कि बेटे के एनकाउंटर की बात गलत है, उसे गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने गोली मारी है।

चाचा शौकीन कहते हैं, ‘मुनफेद वापस नहीं आया, तो हमने 7 बजे सिलखो गांव में पूछताछ की। लोगों ने बताया कि नाके के पास से दो लड़कों को पुलिस ने पकड़ा है।’’

क्या किसी ने गोली चलने की बात कही थी? शौकीन बोले, ‘नहीं, गांववालों ने बताया कि एक भी गोली की आवाज नहीं आई। उन्हें बहुत आसानी से पकड़ा गया। पुलिस ने एक गाड़ी बाइक के पीछे लगाई, दूसरी आगे और पकड़ लिया।’

‘आप ही बताइए, दो लड़कों को पकड़ने में अगर पुलिस को एक-दो घंटे लगते और गोलियां चलतीं, तो इसका मतलब था कि लड़कों के पास बहुत हथियार होते। बरामद तो एक कट्टा हुआ है। क्या कट्टे से एक-दो घंटे गोली चला सकते हैं।’

पत्नी ज्योति ने कहा- पति गाय खरीदने गए थे, सुबह 8 बजे घर से निकले थे…
मुनफेद पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ नूंह के नल्हड़ में रहता है। उसका घर नलहरेश्वर मंदिर से सिर्फ 3 किमी दूर है। हिंसा वाले दिन नलहरेश्वर मंदिर से ही ब्रज मंडल यात्रा निकली थी।

हम मुनफेद के घर पहुंचे, तब अंधेरा हो गया था। लाइट भी नहीं थी। ईंटों से बना सामान्य सा घर है। मिट्टी के चूल्हे पर हांडी चढ़ी थी। घर से 200 मीटर दूर गाय-भैसें बंधी हैं, जहां कुछ गांववाले दूध लेने आए थे।

हमने मुनफेद की पत्नी ज्योति उर्फ आलिया से पूछा कि ग्वारका में तो आपका घर काफी अच्छा है, फिर यहां क्यों रहती हैं? जवाब मिला, ‘यहां बिजनेस अच्छा है। इसीलिए यहां पड़े हैं। कमाना भी तो जरूरी है।’ दरअसल मुनफेद और उसके बिजनेस पार्टनर अंशू मिलकर डेयरी चलाते हैं।

मुनफेद की गिरफ्तारी पर ज्योति कहती हैं, ‘अगर मुनफेद दंगाई है, तो लड़ाई-झगड़े का कुछ तो इतिहास होगा। हम यहां एक साल से रह रहे हैं। लोगों से पूछ लो, अगर मुनफेद ने किसी से झगड़ा किया है। हमारे सारे ग्राहक हिंदू हैं।’

ज्योति कहती हैं, ‘मुनफेद को पुलिस ने फंसाया है। मैं नल्हड़ अस्पताल में उनसे मिलने गई थी, लेकिन मिलने नहीं दिया। मुनफेद 9 अगस्त से लापता थे। उनका फोन बंद आ रहा था। पुलिस ने उसी दिन उन्हें उठाया था।’

आपको कैसे पता कि उसे अस्पताल में दूसरे दिन भर्ती किया? ज्योति ने कहा- हॉस्पिटल में पूरा रिकॉर्ड है। उसे 10 अगस्त को सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर भर्ती किया था।’

हालांकि पुलिस का दावा है कि एनकाउंटर 10 अगस्त की सुबह हुआ और घायल आरोपी को तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। हॉस्पिटल में मीडिया की एंट्री पर रोक है, इसलिए ज्योति के दावे की पुष्टि नहीं हो सकी।

हमने ज्योति से पूछा कि दंगे वाले दिन मुनफेद कहां था? जवाब मिला, ‘सुबह 8 बजे घर से नंगला गांव के लिए निकले थे। उन्हें वहां से डेयरी के लिए गाय खरीदनी थी। दोपहर करीब एक बजे मंदिर में दंगा भड़क गया। मैंने उन्हें कॉल किया। शाम 3 या 4 बजे वो हमें लेने आए। दंगे के दौरान, तो वे यहां थे ही नहीं।’

बातचीत के दौरान ज्योति ने बताया कि वे हिंदू हैं। मुनफेद से उनकी लव मैरिज हुई थी। दोनों कॉलेज में पढ़ते थे। हमने ज्योति से पूछा कि आपकी पहचान अब क्या है, हिंदू या मुसलमान? वे कहती हैं, ‘मैं अपने पति के पीछे हूं। जो उनकी पहचान, वही मेरी पहचान।’

बातचीत के दौरान ज्योति ने कैमरे पर चेहरा दिखाने से मना कर दिया। इसके पीछे दलील दी कि इस्लाम में ससुर के लिए बहू का मुंह देखने की मनाही है। इसलिए वे कैमरे पर नहीं आना चाहतीं।

बातचीत के दौरान ज्योति ने कैमरे पर चेहरा दिखाने से मना कर दिया। इसके पीछे दलील दी कि इस्लाम में ससुर के लिए बहू का मुंह देखने की मनाही है। इसलिए वे कैमरे पर नहीं आना चाहतीं।

बिजनेस पार्टनर बोले- मुनफेद के खिलाफ कोई शिकायत नहीं
मुनफेद के बिजनेस पार्टनर अंशू बताते हैं, ‘मैं मुनफेद को कई साल से जानता हूं। डेढ़ साल पहले उसने डेयरी का काम करने की बात कही। मैं राजी हो गया। एक साल से हम साथ काम कर रहे हैं। यहां मुनफेद के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।’

क्या मुनफेद का राजस्थान आना-जाना था? अंशू ने कहा, ‘मेरा घर राजस्थान के चुहेड़पुर में है। मैं जाता था, तभी मुनफेद भी गया है। उसका रेगुलर आना-जाना नहीं था।’

घरवाले बोले- जुनैद-नासिर से संबंध नहीं…
मुनफेद के पिता और चाचा से भी हमने मुनफेद के राजस्थान कनेक्शन के बारे में पूछा था। उन्होंने बताया, ‘राजस्थान में उनकी फूफी की बेटी की शादी हुई है। शादी-ब्याह में ही आना-जाना होता है, लेकिन मुनफेद एक बार भी उनके घर नहीं गया।’ जुनैद-नासिर के परिवार से संबंध से भी उन्होंने इनकार कर दिया।

भाई ने कहा- सैकुल को गलत पकड़ा गया, वो तो मुनफेद को लेने गया था…
मुनफेद के साथ पकड़े गए सैकुल का घर भी ग्वारका गांव में है। दोनों का घर एक किमी दूर है। सैकुल के पिता करीब 75 साल के हैं। सड़क किनारे उनकी चाय की दुकान है। परिवार की कमाई का यही जरिया है। खेती के नाम पर थोड़ी जमीन है। इससे खाने लायक अनाज ही हो पाता है।

हमने सैकुल के भाई जहूर से पूछा कि क्या आपकी सैकुल से बात हुई है? जवाब मिला- ‘नहीं। एक फोन आया था। फोन करने वाले ने एक नंबर दिया और कहा इस पर सैकुल से बात हो जाएगी। हमने नंबर मिलाया तो बंद जा रहा था। अब तक बंद है।’

आपके भाई की गिरफ्तारी नूंह दंगों के आरोप में हुई है। उस दिन वो सिलखो क्या करने गया था? जहूर बोले, ‘वो मुनफेद को लेने गया था। घर से 3-4 बजे निकला था। वहीं पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शाम तक नहीं आया, तो हम सिलखो पहुंचे। वहां नाके पर एक होमगार्ड सुनील था, हमने उससे पूछा। उसने बताया कि बाइक से जा रहे दो लड़कों को पुलिस ने पकड़ा है, लेकिन गोली चलने की बात, उसने भी नहीं कही।’

एनकाउंटर, मुनफेद के राजस्थान कनेक्शन और दंगे के दिन उसकी नूंह में मौजूदगी पर सवाल…

एनकाउंटर की थ्योरी पर…

  1. अगर एनकाउंटर हुआ, तो गांव वालों ने गोलियों की आवाज क्यों नहीं सुनी?
  2. गांव वाले कह रहे एक गोली की आवाज सुनी, लेकिन मुनफेद और सैकुल की गिरफ्तारी के अगले दिन। क्या मुनफेद और सैकुल को बिना गोली चलाए एक दिन पहले पकड़ा गया था?
  3. एनकाउंटर के बाद पुलिस घरवालों को मुनफेद और सैकुल से क्यों नहीं मिलने दे रही? क्या कुछ छिपाने की कोशिश हो रही है?

क्या मुनफेद का राजस्थान जाना, जुनैद-नासिर हत्याकांड से कनेक्शन जोड़ता है…

  1. मुनफेद के परिवार ने बताया कि उसके पिता की बुआ की लड़की राजस्थान में ब्याही है।
  2. मुनफेद के पार्टनर का घर राजस्थान के चुहेड़पुर गांव में है। हालांकि चुहेड़पुर अलवर जिले में है, जबकि जुनैद-नासिर का गांव घाटमीका भरतपुर में है। दोनों जिलों के बीच की दूरी 144 किमी है।

मुनफेद के मोबाइल की लोकेशन की अब तक जांच नहीं
मुनफेद के मौजूदा घर और नलहरेश्वर मंदिर के बीच सिर्फ 3 किलोमीटर का फासला है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पुलिस के पास शक करने की ये बड़ी वजह है। हालांकि मुनफेद के मोबाइल की लोकेशन इस शक को साबित कर सकती है या नकार सकती है। तब लोकेशन की जांच क्यों नहीं हुई?

पुलिस जांच के मामले पर जवाब नहीं दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक फोन की लोकेशन की जांच ही नहीं हुई है।

एनकाउंटर पर पुलिस चुप, टीम लीड करने वाले अफसर का ट्रांसफर
आरोपियों के परिवार का कहना है कि पुलिस ने मुनफेद और सैकुल को 9 अगस्त को उठाया। 10 अगस्त को उन्हें सिलखो गांव ले जाकर एनकाउंटर किया गया। इस पर हमने नूंह के DSP सुरेंद्र सिंह और तावड़ू के DSP मुकेश सिंह से बात की।

DSP सुरेंद्र सिंह ने कहा कि ये मामला हमारे नोटिस में नहीं है। दंगे की जांच के लिए 260 टीमें बनी हैं। ये मामला तावड़ू का है। आप तावड़ू DSP से पूछें।

तावड़ू के DSP मुकेश सिंह ने PRO से बात करने के लिए कहा। बोले, ‘एविडेंस कलेक्ट करने के लिए अभी आउट ऑफ स्टेशन आया हूं। PRO ही आपको कुछ बता पाएंगे।’

इसके बाद हमने नूंह के PRO कृष्णन को फोन किया। उन्होंने कहा- ’हमने उसी दिन मीडिया को वॉट्सऐप मैसेज जारी कर दिया था।’ हमने पूछा एनकाउंटर जैसी घटना के लिए क्या कोई प्रेस रिलीज या प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। उन्होंने जवाब देने की जगह फोन काट दिया।

पुलिस PRO ने 10 अगस्त को ये मैसेज मीडिया के लिए बनाए ग्रुप में भेजा था। इसमें न एनकाउंटर की तारीख है और न ही सही लोकेशन।

मैसेज में टीम को लीड करने वाले अधिकारी का नाम निरीक्षक संदीप मोर लिखा था। हमने उन्हें फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा। ये भी पता चला कि संदीप मोर का ट्रांसफर तावड़ू से पुन्हाना कर दिया गया है। सूत्र इसे रूटीन ट्रांसफर बता रहे हैं।

भड़काऊ बयान देने पर मोनू मानेसर को क्लीन चिट
नूंह में 31 जुलाई को ब्रज मंडल यात्रा निकली थी। नल्हड़ के नलहरेश्वर मंदिर से शुरू होकर यात्रा डेढ़ किमी आगे बढ़ी थी कि दंगे शुरू हो गए। उपद्रवियों ने 6 घंटे तक बवाल किया। 150 से ज्यादा गाड़ियां फूंक दीं। इस हिंसा में होमगार्ड के 2 जवानों समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी।

यात्रा से पहले बजरंग दल से जुड़े मोनू मानेसर, बिट्‌टू बजरंगी और कांग्रेस विधायक मामन खान पर भड़काऊ बयान देने के आरोप लगे। बिट्‌टू बजरंगी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। हालांकि ADGP ममता सिंह ने बिट्टू बजरंगी की गिरफ्तारी पर कहा है कि उसे दंगा या हिंसा भड़काने के आरोप में नहीं पकड़ा गया है। मोनू मानेसर अभी फरार है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा पुलिस मोनू मानेसर के बयान को भड़काऊ नहीं मान रही है। पुलिस का कहना है कि यात्रा से पहले मोनू मानेसर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि मैं आ रहा हूं, आप भी यात्रा में शामिल हों। ये कहना कि वो एक यात्रा के लिए आ रहे हैं, नफरत फैलाने की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि हरियाणा पुलिस ने इस बयान की पुष्टि नहीं की है।

Ramswaroop Mantri

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