अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

जीवांत जीवन

Share

बढो़ गए जीवन में तो
उड़ते रहो गए
जीवांत पक्षी की तरह
नहीं तो टूट कर
बिखर जाओगी
किसी शाख के
मुझराये पते की तरह।

जीवांत हो तो
जीना पड़ेगा
सूर्य चांद की तरह
नहीं तो पड़े रहो गए
शमशान की
जली बुझी हुई
राख की तरह।

जीवांत हो तो
महकते रहो गए
किसी सुगंधित
फूलों की तरह
नही तो मुझरा जाओ गए
किसी टूटे बिखरे
फूल की तरह।

डाँ.राजीव डोगरा
(युवा कवि व लेखक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें