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क्यों ज़रूरी है कॉन्वेंट स्कूलों का वहिष्कार!?

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नयना जोशी (पुणे)

 _मैने बहुत सारे निजी स्कूलों में फीस की जानकारी ली। वार्षिक शुल्क      ₹40,000 से लेकर ₹100000 तक स्कूल प्रमुख ने बताए। यह फीस नर्सरी से लेकर पहली कक्षा तक के एडमिशन हेतु बताई गई।_
   आगे बालक जितनी ऊंची कक्षा में जायेगा, फीस और बढ़ेगी ही। अब 17 साल तक  स्कूलों में इस हिसाब से फीस भरने के बाद भी नौकरी की कोई गारंटी नहीं है. और +2 के बाद कोर्सेज की फीस अलग।

बालक पूर्णतः योग्य हो जायेगा इसकी भी कोई ग्यारंटी नहीं है। फिर वह विदेशों मे नोकरी तलाश करेगा और सफल रहा तो आपको छोड़ कर विदेश में जा बसेगा।
हर साल जितनी फीस ये स्कूल मांगते हैं, इतनी फीस के रिलायंस , एचडीएफसी ,कोटक, बिरला नीपोन ,यूटीआई , केनेरा आदि किसी भी अच्छी कंपनी के म्यूच्यूअल फंड स्कीम के तहत हर वर्ष एक लाख के यूनिट खरीद लिये जायें तो?
इसलिए बच्चों को शासकीय विद्यालय में प्रवेश दिला दें। वहां भी योग्य शिक्षक होते हैं और विद्यार्थी अगर इंटेलिजेंट है तो वहां से भी वह श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त कर सकता है। अलग से ट्युशन तो आप बच्चे के लिए लगाते ही हैं, चाहे वे कैसे भी पब्लिक स्कूल मे पढ़ें.
तो हम कान्वेंट में और दूसरे शोपीस वाले स्कूलों में इतनी फीस क्यों दें ! यदि यह फीस हर साल एक लाख रुपये म्यूचुअल फंड में जमा की जाये तो 17 साल बाद उस बालक के खाते में कम से कम डेढ़ करोड़ और ज्यादा से ज्यादा 21 करोड़ की रकम जमा होगी और उसे कहीं नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कहीं और भी जमा कर सकते है. इतना पैसा बचाकर आपकी संतान इतनी सक्षम होगी कि अपना स्वयं का उद्योग स्थापित कर लोगों को नौकरी दे सकेगी।
(चेतना विकास मिशन)

Ramswaroop Mantri

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