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हास्य कवि सम्मेलन का नाम ‘बजरबट्‌टू’ क्यों पड़ा?

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इंदौर में रंगपंचमी के एक दिन पहले परम्परागत हास्य कवि सम्मेलन बजरबट्‌टू का आयोजन है। इसके पूर्व क्षेत्र से एक शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय अलग रूप में नजर आएंगे। पूरे समय गुदगुदाने वाले कवि सम्मेलन का नाम ‘बजरबट्‌टू’ क्यों रखा गया। इसके पीछे थीम क्या है। हर ‘बजरबट्‌टू’ सम्मेलन में विजयवर्गीय ही क्यों अलग-अलग रूप में नजर आते हैं, ऐसे सवाल कई लोगों के जेहन में है। कई लोगों को ‘बजरबट्‌टू’ का अर्थ भले ही नहीं पता, लेकिन सुनकर ही हंसी आ जाती है। जानिए आयोजक भूपेंद्रसिंह केसरी व संयोजक अशोक चौहान (चांदू) की जुबानी कैसे पड़ा हास्य कवि सम्मेलन का बजरबट्‌टू नाम…

बकौल केसरी पूर्व में हम सभी मल्हारगंज क्षेत्र के साथ हिन्द मालवा के नाम से रंगारंग गेर का आयोजन करते थे। कुछ सालों तक गेर निकाली, फिर हम सभी ने कवि सम्मेलन करने का मन बनाया। नाम को लेकर सभी ने काफी मंथन किया। तय हुआ कि नाम ऐसा रखा जाए जो खुद ही हास्य पैदा करे इसलिए नाम ‘बजटरबट्‌टू’ रखा गया। दरअसल ‘बजरबट्‌टू’ का अर्थ होता है पहाड़ी पर चलने वाला घोडा। इस घोड़े का काम ऐसा रहता है कि उस पर जो सामान लाद दिया जाए वह काम निपटा कर वापस आता है। दूसरी ओर पत्रकारों को भी देखे तो उनका भी काम यही रहता है कि वे जिस मिशन के लिए निकलते हैं वह काम पूरा व्यवस्थित करके आते हैं। इसके चलते कार्यक्रम का नाम पत्रकारों को समर्पित कर नाम ‘बजरबट्‌टू’ रखा गया।

सचिन तेंदुलकर बन चुके हैं विजयवर्गीय।

सचिन तेंदुलकर बन चुके हैं विजयवर्गीय।

पहले रंग पंचमी पर निकलने वाले गेर में परिवारों की सहभागिता नहीं हो पाती थी। स्थिति यह थी कि महिलाएं आती नहीं थी क्योंकि अश्लीलता, फूहड़ता होती थी। ऐसे में गेर बंद कर भव्य शोभा यात्रा का मन बनाया। 1999 में हम लोगों ने वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय से चर्चा की कि हम इस शोभायात्रा में आपको अनोखे रूप में लेकर आना चाहते हैं। यह भी बताया कि इस शोभा यात्रा को रंग पंचमी के एक दिन पहले निकालने का मन है इसमें विजयवर्गीय का बहुत सहयोग मिला।

भगवान विष्णु के गेट अप में सामने आए थे।

भगवान विष्णु के गेट अप में सामने आए थे।

कार्यकर्ता 364 दिन मेरे लिए काम करते हैं, मैं एक दिन क्यों नहीं

केसरी के मुताबिक कई बार विजयवर्गीय से लोगों ने पूछा कि आपको कुछ भी बना देते हैं, आप इसके लिए तैयार कैसे हो जाते हो? इस पर उनका बहुत ही सटीक जवाब था कि मेरे कार्यकर्ता मेरे लिए 364 दिन काम करते हैं तो एक दिन उनके लिए करने में क्या है। वे पिछले 14 सालों से लगातार कभी सुपरमैन, शक्तिमान, जादूगर, चाणक्य, विष्णु भगवान, सचिन तेंदुलकर सहित कई रूप में जनता के बीच में आ चुके हैं।

बाहुबली के रूप में भी आ चुके।

बाहुबली के रूप में भी आ चुके।

मेकअप टीम व विजयवर्गीय को ही रहती है नए रूप की जानकारी

कार्यक्रम का नाम ‘बजरबट्‌टू 1999 से चल रहा है। विजयवर्गीय के लिए मेकअप आर्टिस्ट मुंबई से आते हैं, इसका जिम्मा टीम के दादा पांडे के पास है। टीम ही उनका रूप तय करती है। इसकी जानकारी सिर्फ मेकअप टीम व विजयवर्गीय को ही रहती है कि वे क्या बनने वाले हैं। जब वे बाहर आते हैं तब ही लोगों को पता चलता है कि वे क्या बने हैं। इसके पूर्व लोगों में उनके रूप को लेकर काफी कौतूहल रहता है। उन्हें मेकअप दो घंटे करने में लगते हैं।

...और आचार्य चाणक्य के रूप में भी सामने आए।

…और आचार्य चाणक्य के रूप में भी सामने आए।

विजयवर्गीय के नए रूप पर इनाम को लेकर 25 हजार प्रविष्ठि

आयोजकों ने 2019 से विजयवर्गीय के नए रूप के बारे में बताने पर इनाम देने की परम्परा शुरू की। हालांकि 2020, 2021 और 2022 में कोरोना और सड़क निर्माण के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। इस बार पहला इनाम 1.50 लाख, दूसरा इनाम 1 लाख व तीसरा इनाम 50 हजार रु. है। इस बार 25 हजार के करीब प्रविष्ठियां आ चुकी हैं।

Ramswaroop Mantri

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