मैं हूँ सशक्त नारी

मनीषा छिम्पा
लूणकरणसर, राजस्थान
क्यों कहें तुझको अबला, तू तो है शक्ति की मिसाल,
तेरे कदमों से रोशन हो जाए हर एक हाल,
चूल्हा, चौका ही क्यों, तुझे कलम भी थामनी है,
हर मंजिल पर तेरा नाम अब लिखवाना है,
दहलीजो में मत क़ैद रह, तू नाम की उड़ान भर,
हर सपने को सच कर, अब ख़ुद पर तू गर्व कर,
तेरे बिना अधूरा है समाज का आकार,
तू डटे तो बदल जाए संसार का व्यवहार,
दहेज, भेद, बंदिशे अब तुझे नहीं है सहनी,
तेरी चुप्पी नहीं, आवाज़ बनेगी तेरी कहानी,
शिक्षा, सम्मान, हक ये सब हैं तेरे अधिकार,
हर दीवार गिरा, तुझमें अब नया संसार है,
बेटी, बहन, माँ, पत्नी हर रूप में है तू महान,
तेरे बिना अधूरा है ये घर और सारा जहान,
अब वक्त है कि तुझे नमन करे सारा संसार,
ज़माना ख़ुद कहे- तू है सशक्त, तेरी जीत है हर बार।।
फिर आई हूँ

हुल्लास नायक
नाथूसर, लूणकरणसर
लो मैं फिर आई हूँ,
कुछ तुम्हें सुनाने को,
अंतर्मन की व्यथा बताने,
राष्ट्रहित लहराने को,
देखो देखो क्या ये हो गया,
क्या नारी के साथ ही होना था,
मैं आई फिर स्त्री के प्रति,
संसार में मातृत्व जगाने को,
बेटी की इस समाज में,
उज्ज्वल छवि बताने को,
ख़ुद का हक़ खुद ही लेना,
ये ही बात उन्हें बताने को,
वंचित जिससे रही है स्त्री,
वो हक़ फिर से दिलाने को,
सावित्रीबाई फुले के सपने को,
साकार बनाने उनकी इच्छा को,
लो मैं फिर आई हूँ,
शिक्षा को लौ जलाने को।।
मैं हूँ प्रश्नों की ज्वाला

दीपिका कुमारी बामणिया
जैसलमेर, राजस्थान
संदेह मेरा स्वभाव है,
सत्य को परखता मनभाव है,
शून्य से पूछूँ हर एक सवाल,
क्या है जीवन? क्या है काल?
स्वतंत्र विचार मेरी रीति,
न बंधन, न कोई नीति,
जो सोचूं, वही मैं कहूं,
भीड़ से अलग, खुद में रहूं,
न स्वर्ग की है मुझे कोई आशा,
न नरक की है मुझ में कोई छाया,
मैं खुद ही अपना सत्य बनाऊं,
शिक्षा को लौ जलाने को।।
बेचैन रास्ते गाँव के

भावना
कक्षा-12, उम्र-17
कन्यालीकोट, कपकोट
बागेश्वर, उत्तराखंड
बेचैन रास्ते गाँव के, जैसे किसी कदमों को पुकार रहे हों,
बंद दरवाज़े मकानों के, जैसे अन्दर से दस्तक दे रहे हों,
लोग आज सबकुछ छोड़कर, शहर की ओर चल दिए हैं,
मानो गाँव की नदियाँ रूठकर, समुद्र की लहरों में चल दी हो,
वो गाँव, जो कभी सबकी धड़कन हुआ करता था,
वो आंगन, जहाँ कभी बच्चों की आवाज़ें सुनाई पड़ती थी,
वो खेत, जो कभी फसलों से लहलहाया करती थीं,
आज वह सब कुछ वीरान सा नजर आने लगा है,
क्योंकि इंसान गांव छोड़कर शहरों में आबाद हो गया है।।




